बुधवार, 15 जून 2022

संयुक्त राष्ट्र महासभा और हिंदी

 संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से बहुभाषावाद पर भारत के प्रस्ताव को पारित किया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने अपनी भाषाओं में हिन्दी को शामिल कर लिया है। प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र के कामकाज में हिन्दी व अन्य भाषाओं को भी बढ़ावा देने का पहली बार जिक्र किया गया है। आइए जानते हैं इसके क्या मायने हैं और भारत के लिए यह कितनी बड़ी सफलता है?



पहले जान लें UNGA आधिकारिक भाषाएं :


संयुक्त राष्ट्र महासभा की छह आधिकारिक भाषाएं हैं। इनमें अरबी, चीनी (मैंडरिन), अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश शामिल हैं। इसके अलावा अंग्रेजी और फ्रेंच संयुक्त राष्ट्र सचिवालय की कामकामी भाषाएं हैं। लेकिन अब इनमें हिन्दी को भी शामिल किया गया है। इसका साफ मतलब यह है कि संयुक्त राष्ट्र के कामकाज, उसके उद्दश्यों की जानकारी यूएन की वेबसाइट पर अब हिन्दी में भी उपलब्ध होगी।


हिन्दी के लिए भारत ने दिए थे आठ लाख अमेरिकी डॉलर :

हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार लंबे समय से प्रयास कर रही है। कई हिन्दी सम्मेलनों में संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को आधिकारिक मान्यता दिलाने की मांग उठ चुकी है। इन सबके बीच पिछले महीने ही भारत सरकार की ओर से संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी भाषा के उपयोग को बढ़ावा देन के लिए आठ लाख अमेरिकी डॉलर का सहयोग दिया गया था। भारत के स्थायीय मिशन की ओर से ट्वीट कर इसकी जानकारी दी गई थी।


क्या है ‘हिन्दी @ यूएन’ ? :

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने बताया कि यूएन में हिन्दी को बढ़ावा के लिए 2018 में ‘हिन्दी @ यूएन’ परियोजना आरंभ की गई थी। इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र की सार्वजनिक सूचनाएं हिन्दी में देने को बढ़ावा देना और दुनियाभर के करोड़ों हिन्दी भाषी लोगों के बीच वैश्विक मुद्दों के बारे में अधिक जागरूकता लाना है। मिशन के तहत भारत 2018 से यूएन के वैश्विक संचार विभाग (डीजीसी) के साथ साझेदारी कर रहा है। यूएन के समाचार और मल्टीमीडिया सामग्री को हिन्दी में प्रसारित करने व मुख्यधारा में लाने के लिए अतिरिक्त राशि दे रहा है।

गुरुवार, 12 मई 2022

सतगुरु प्यारे ने गिराया, काल कराला हो

 **राधास्वामी!! -                        

   04-08-2021-आज सुबह सतसंग में पढे गये पाठ:-                                                      

     सतगुरु प्यारे ने गिराया, काल कराला हो।।टेक।।                                                         सुन सुन महिमा सतसँग केरी। दरशन कर हुई चरनन चेरी। गुरु लीन सम्हाला हो।१।                                                                    नाद की महिमा गुरु मोहि सुनाई। जस उतपति हुई सब गाई। लखा गुरु देश निराला हो।२।                                                         ता के नीचे काल पसारा। माया ब्रह्म और तिरगुन धारा। सब रचना दुख साला हो।३।                                                            गुरु ने निकसन जुगत बताई। शब्द भेद दे सुरत लगाई। लखा जोत जमाला हो।४।                                             त्रिकुटी होय गई दस द्वारे। भँवरगुफा सतलोक निहारे। मिले पुरुष दयाला हो।५।                                                      काल बिघन गुरु दूर कराये। मन माया भी रहे मुरझाये। गुरु कीन निहाला हो।६।                                                                      पुरुष दया कर अंग लगाई। बल अपना दे अधर चढाई। जहाँ राधास्वामी तेज जलाला हो।७।।                   (प्रेमबानी-3-शब्द-22-पृ.सं.119,120)                                                                                                                                                                                                                                                🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**

[8/4, 06:06] +91 94500 70604: 🌻🍁🙏🏻 *राधास्वामी* 🙏🏻🍁🌻      सतसंग परिवार के सभी प्रिय सदस्यों को        *" _हार्दिक राधास्वामी_ "*  *कुल मालिक हुज़ूर राधास्वामी दयाल की दया व मेहर का हाथ सदैव हमारे परिवार पर बना रहे।  🙏राधास्वामी* 🙏                                   💐🌻🍃🌻🍃🌻🌻🍃💐

[8/4, 12:55] +91 97176 60451: राधास्वामी!! -                            04-08-2021-आज शाम सतसंग में पढा जाने वाला दूसरा पाठ:-                                                       राधास्वामी मेरी सुनो पुकारा। घट प्रीति बढ़ाओ सारा।१।••••••                                                                              नित नित भरमन में भरमाई। सत्संग बचन न चित्त समाई।९।                                       कुमति अधीन हुआ अब यह मन। कौन सुधारे इसको गुरु बिन।१०।                                याते करूँ प्रकार पुकारी। हे राधास्वामी मोहि लेव सम्हारी।११।                                       दीन अधीन पड़ी तुम द्वारे। तुम बिन अब मोहि कौन सुधारे।१२।                             चरन बिना नहिं ठौर ठिकाना। जैसे काग जहाज़ निमाना।१३।                                     तुम बिन और न कोई आसर। राधास्वामी २ गाँऊ निस बासर।१४।                                                                                               अब तो लाज तुम्हे है मेरी। सरन पड़ी होय चरनन चेरी।१५।                               राधास्वामी पति और पिता दयाला। अपनी मेहर से करो निहाला।१६।                                                                      (प्रेमबानी-1- शब्द- 9 -पृ.सं.,118, 119 )                                                                                                                                                                              🙏🏻राधास्वामी🙏🏻

रिश्ते ही रिश्ते वाले प्रो.. अरोड़ा / अनामी शरण बबल

 वाह प्रो. अरोड़ा 🙏🏿. 1984 में जब पहली बार मैं दिल्ली के  लिए चला तो कालका मेल के साथ सफर  आरंभ किया औऱ मुग़ल सराय में सुबह हो गयी. इसके बाद शाम होते होटे टूंडला स्टेशन  पार किया. यूपी के न जाने कितने स्टेशन गांव देहात शहर से रेल गुजरती रही मग़र रेल पटरियों के करीब के दीवारों पर केवल एक ही  विज्ञापन लिखा देखा. रिश्ते  ही रिश्ते  प्रो. अरोड़ा 28 रैगर पूरा delhi 110055 रेल में बैठा मैं बिस्मित प्रो अरोड़ा की प्रचार शैली पर मुग्ध था.


 पहली बार दिल्ली आ रहा था मगर दिल्ली आने से पहले ही मेरे लिए एक हीरो की तरह प्रो. अरोड़ा का उदय हो चुका था. दिल्ली में बैठे एक आदमी की ताक़त औऱ काम के फैलाव क़ो लेकर मैं अचंभित सा था. उस समय मेरी उम्र 19 साल की थी लिहाज़ा समझ से अधिक उमंग  उत्साह भरा था. प्रो अरोड़ा औऱ विवाह का यह स्टाइल दोनों मेरे लिए नये थे. प्रो. अरोड़ा से मिलने  इंटरव्यू करने की चाहत मन में जगी थी मगर पहली बार दिल्ली जाने औऱ उसके भूगोल से अनजान  मैं इस चाहत क़ो मन में ही दबा सा दिया,


अलबत्ता मेरे दिमाग़ पर प्रो. अरोड़ा छा  गये थे. राधास्वामी सतसंग सभा दयालबाग़ के करोलबाग़ ब्रांच का सतसंग हॉल के ऊपर वाले गेस्ट रूम मेरा पहला पड़ाव बना था. अगले दिन सुबह सुबह दिल्ली का मेरा दोस्त अखिल अनूप / अब ( अनूप शुक्ला ) भगवान दास मोरवाल के साथ मिलने आ गया.


 उल्लेखनीय है कि करीब 30-32'साल के बाद पालम गांव के अपने घर पर मोरवाल जी ने बताया कि अखिल के साथ मैं ही मिलने करोलबाग़ आया था.  यह सुनकर मैं खुश भी हुआ औऱ अफ़सोस  भी यह हुआ कि उस समय मैं मोरवाल जी क़ो जानता भी नहीं था.


 हा तो मैं करोलबाग़ के 28  के एकदम पास मे ही टिका था तो यह जानते ही दोपहर के बाद अपने पड़ोसी प्रो.  अरोड़ा के घर के बाहर  काल बेल बजा कर खड़ा था. घर सामान्य सा ही था तभी दरवाजा खुला औऱ एक अधेड़ सा आदमी ने दरवाजा खोला. नमस्कार उपरांत मैंने कहा  मैं अनामी शरण  बबल  पत्रकार, देव औरंगाबाद बिहार से आया हूँ.. दो दिन पहले ही पहली बार दिल्ली आया औऱ मुगलसराय के बाद से लेकर दिल्ली तक दीवारों पर लिखें आपके विज्ञापनो क़ो देखते देखते आपसे मिलने कि चाहत हुई.


मेरी बातों क़ो सुनकर वे  खिलखिला कर हंस पड़े औऱ तुरंत मुझे अंदर आने के लिए कहते हुए रास्ता छोड़ दी. विदेशो में भी शादी कराने का दावा करने वाले प्रो. अरोड़ा  ने बताया कि इनके माध्यम से विवाहित  कुछ जोड़े विदेशो में भी है औऱ उनकी मदद से ही कुछ विदेशी जोड़ो कि भी शादियां हुई है लिहाज़ा विज्ञापन कि शब्दावली में विदेश भी जुड़ गया.


सहज सरल मीठे स्वभाव के प्रो. अरोड़ा से कोई एक घंटे तक बात की इस दौरान उन्होंने चाय औऱ नाश्ता भी कराया.  मैंने उनसे कहा भी की ट्रेन यात्रा के  दौरान आप मेरे दिमाग़ पर हीरो की तरह छा गये थे मगर आपसे मेरी मुलाक़ात होगी यह सोचा नहीं था. मेरी बातें सुनकर वे खुश होते मुस्कुराते सहज भाव से अपने बारे में बताते.  मैं विज्ञापनो के इस राजकुमार प्रो अरोड़ा की सरलता पर चकित था दिल्ली से बिहार लौटने के बाद प्रो. अरोड़ा  के इंटरव्यू क़ो कई अखबारों में छपवाया. ढेरों लोगों क़ो प्रो. अरोड़ा के बारे में बताया. प्रो. अरोड़ा  के पास सारे कतरन भेजा. कई पत्रचार भी हुए औऱ अक्सर धन्यवाद ज्ञापन के पत्र मेरे पास आए, जिसमें दिल्ली आने पर मिलने के लिए वे जरूर लिखते थे.

  जुलाई 1987  से तो मैं दिल्ली में ही आ गया औऱ 1990  से दिल्ली का ही होकर दिल्लीवासी या डेल हाईट हो गया.  मगर प्रो. अरोड़ा से फिर कभी मिल नहीं सका.  विवेक जी आपने प्रो. अरोड़ा पर लिख कर दिल्ली की पहली यात्रा के साथ साथ उनसे हुई 37 साल पहले की मोहक यादों क़ो जिंदा कर दिया  बहुत सुंदर लिखा है आपने औऱ कमैंट्स लिखने के बहाने मैंने भी प्रो. अरोड़ा पर  पूरा रामायण अंकित कर दी.  वाह शुक्ला जी गज़ब ✌🏼👌👍🏼

शनिवार, 26 मार्च 2022

Ap सा कोई नहीं / अनामी शरण बबल

 औरंगाबाद वाले अखौरी प्रमोद का रांची ( JK) संस्करण  / अनामी शरण बबल


साथ साथ लेखमाला लिखने की इस कोशिश में इसबार मैं एक ऐसे व्यक्ति पर कुछ लिखने का प्रयास कर रहा हूँ जिसके सामने मैं आज भी एक स्टूडेंट की तरह ही हूँ. जब भी और जहाँ कहीं भी इनकी चर्चा होती हैं तो इनका चेहरा मेरी आँखों के सामने घूमने लगता हैं. बिहार के देव जिला औरंगाबाद  से आकर दिल्ली में सक्रिय होकर आबाद हुए 35  साल (1987-2022) हो गये हैं, और इस दौरान  अनगिनत लोगों से मिला उन्ही लोगों में कुछ पर लिखने की यह पहल हो रही 


: ख़ासकर अपनों या लंबे समय से परिचित करीबियों के प्रति कुछ भी लिखना सबसे कठिन होता हैं. बातों और यादों का सिलसिला भी इतना बड़ा होता हैं की  क्या लिखें क्या छोड़ दे या लिखने के क्रम में क्या छूट गया या (जाय )  इसका खतरा हमेशा बना रहता हैं. मैं इस बार अपने युवकाल  कहे  या अपनी पहचान के लिए जूझ रहा था उस समय के एक व्यक्ति पर शब्दों का घरौंदा बना रहा हूँ जहाँ पर मैं कुछ नहीं था. मैं मूलतः औरंगाबाद जिले के  धार्मिक कस्बे के रुप में बिख्यात देव का रहने वाला था. मगर कथाक्षेत्र जिला मुख्यालय औरंगाबाद हैं. बात मैं जिला के विख्यात फोटोग्राफर अखौरी प्रमोद की कर रहा हूँ जो मूलतः एक सरकारी नौकरी में रहते हुए भी सबके लिए सर्वविदित सर्व विख्यात सर्व सुलभ और सर्वत्र मुस्कान के संग उपलब्ध पाए जाते थे. समय के पक्के उस्ताद अखौरी प्रमोद क़ो ज्यादातर लोग जानते थे, मगर वे एक सरकारी नौकरी भी करते हैं इसकी जानकारी सबो क़ो शायद नहीं थी. मोबाइल का जमाना नहीं होने के बावजूद छायालोक स्टूडियो तक कोई खबर पंहुचा देने के बाद शायद ही कभी ऐसा होता होगा की समय पर AP ना पहुंचें हो कभी. साफ कर दू की उस समय अखौरी प्रमोद जी क़ो लोग AP का सम्बोधन देने की हिममत नहीं करते थे. AP तो दूर की बात जी लगाए बगैर शायद ही कोई होता हो जो केवल  अखौरी प्रमोद कहता हो. दूसरों क़ो Ap ने  शायद ही कभी तू तडाक या गरम लहज़े में बात की होगी . शायद इसी का प्रतिफल था कि ज़िलें में शासन प्रशासन नेता नौकरशाह से लेकर ढेरों लड़कियां सहित हर तरह के लोगों के बीच AP खासे सर्वप्रिय थे.आदर के पात्र भी. 


 औरंगाबाद से मेरा नाता भी अजीब हैं. मेरे पापा सहित दो दो चाचा का ससुराल भी धरनी धर  रोड  औरंगाबाद में हैं यानी यह शहर ही मेरे लिए मेरा ननिहाल (था ) हैं

 मैं अपनी मौसियों से कहता भी था की औरंगाबाद का हर लड़का मेरा मामा और लड़की मेरी मौसी हैं.

खैर छायालोक वाले मोहन मामा क़ो जानता था और ढेरों से अपने परिचय के सूत्रधार दिवंगत प्रदीप कुमार रोशन भी रहें हैं जो खुद बहुत बडे शायर थे


बात कोई 1983- 84 की रही होगी जब मैं  लेखक या पत्रकार नहीं था. कुछ लिखने का ककहरा  सीख रहा था और मन में अपार ऊर्जा  उमंग हिलोरे मार रहा था.  पढ़ाई में भी इतना बुरा नहीं था  अगर  सरकारी नौकरी की ललक होती तो  कहीं न कहीं सेट कर ही लेता या हो जाता, मगर अखबार में नाम का ऐसा खुमार था कि मैं इसी में पगलाया हुआ था. खैर पागलपन से ही कुछ पाया भी जा सकता हैं  मैं AP से कैसे कब किस और किसके संग परिचित हुआ यह तो याद नहीं हैं मगर जब एक दूसरे क़ो जानने लगा तो कब किस तरह और कितना घुल मिल गया इसकी याद भी गज़ब की हैं. उभरता हुआ पत्रकार कहे या नवसिखुआ इस अंतर पर खुद कहना  अजीब लगता हैं  कोई खास पहचान साहस पहचान परिचय और सलीका नहीं होने के बाद भी AP हर कदम पर मेरे साथ नजर आते ( रहते ) थे.


i: बात उन दिनों की हैं जब देव की क्या बिसात पूरे औरंगाबाद  जिले में ही पत्रकारों का घोर अकाल था. कहने क़ो तो कुछ वकील पत्रकार थे, मगर काले लिबास वाले झूठ के कारोबारी वकील नुमा पत्रकारों से मिलने की मन में कभी इच्छा नहीं हु, और मैं स्वनाम धन्य  पत्रकात वकीलों से कभी नहीं मिला. जब कभी भी काले कपडे वाले वकील से अधिक पत्रकारों की चर्चा होती तो  लोग इतनी शालीनता विनम्रता और आदर से नाम लेते मानो ऐसा नहीं करना भी कोई अपराध हो. हालांकि मैं भी नौ सिखुआ ही था मगर दूसरों की शर्तो अपनी  लक्ष्मण रेखा क़ो बदलना कभी गवारा नहीं होता.  हाँ तो 1983-86 तक कहने दिखने दिखाने के लिए केवल एक ही पत्रकार थे. औरंगाबाद बाजार में पोस्ट ऑफिस के निकट विमला मेडिकल स्टोर के मालिक कहे या दवाई विक्रेता विमल कुमार..


जी हाँ दिन भर दवाई बेचते बेचते  कभी कभार कोई रिपोर्ट भी लिख कर गाड़ी से पटना भेज देते थे. खबरों के लिए भटकने की बजाय विमल जी केवल उन्ही खबरों क़ो न्यूज़ की तरह भेजते थे जो उनकी दुकान तक आ जाय. यानी स्वार्थ रहित पत्रकार  विमल में सरकारी लाभ और रुतबे का गुमान नहीं था इस कारण सरकारी PRO क़ो भी प्रेस रिलीज़ विमल जी के दुकान तक पहुंचानी पड़ती  थी. यही रुतबा और मान विमल जी क़ो पत्रकारिता से जोड़े हुए था. और NBT जैसे अख़बार क़ो भी पत्रकारों से अकालग्रस्त जिला औरंगाबाद में विमल जैसे दुर्लभ पत्रकार ही मिल पाया. बिना किसी लाग लपेट के विमल जी से सीधे मिलकर अपना परिचय दिया तो वे काफ़ी खुश हुए कुछ खबर लाकर ( लिखकर ) देने का उन्होंने सुझाव दिया. तो दर्जनों खबर लिखकर विमल जी क़ो देने लगा या उनके पास उपलब्ध न्यूज़ क़ो ही दुकान में बैठे बैठे ही लिखने की चेष्टा करता  जिसके लिए विमल जी मेरे प्रति हमेशा स्नेह रखते थे. उधर मैं अपनी लिखी खबरों क़ो प्रिंट देख कर खुश होता की मुफ्त में न्यूज़ लिखने की आदत से तो हाथ मंज रहा था.


 ये तो विमल विनोद कथा के बहाने मीडिया के प्रति अपने मस्का चस्का क़ो माप रहा था, मगर अघोषित तौर पर जिले में एक और पत्रकार छायाकार थे जो स्कूटी पर होकर सवार होकर ज्यादातर या यों कहे कि सभी आयोजनों में फोटो खींचते अधिकारियो से मिलते जुलते रहते थे.  वे सक्रिय पत्रकार छायाकार हैं भी या नहीं यह तो बाद की बात हैं मगर औरंगाबाद में कोई भी राजनैतिक सामाजिक  प्रशास.निक  धार्मिक कार्यक्रम हो या कोई आंदोलन जलसा जुलुस  दंगा या बंदी हो तो जनाब छायाकार पत्रकार के रुप में हरदम हमेशा या सर्वत्र सुलभ उपलब्ध होंगे ही होंगे. बात अखौरी प्रमोद की हो रही हैं जो ( यह बाद में ज्ञात हुआ ) एक सरकारी विभाग में कार्यरत होने के बावजूद घर दफ्तर बाजार और घटनास्थलो पर वे कैसे और किस तरह मौजूद रहते या हो जाते थे 


पत्रकारिता के जोश जुनून और ताप के (चलते) साथ साथमैं भी हवा कि तरह हर जगह पहुंचने की कोशिश करता. 1987 में जिला औरंगाबाद के दरमियाँ और दलेलचक बघौरा नरसंहार की सुबह सुबह पता चलते ही मैं  कोई 10-11 बजे तक घटनास्थल पर जा पहुंचा जहाँ पर मुझसे भी पहले श्रीमान छायाकार अखौरी प्रमोद दे दनादन फोटो खींचने में मुस्तैद थे . AP जी क़ो देखते ही मेरा हौसला परवान  पर होता और मैं उनके पास क्या पहुंचा की सारा प्रशासन पुलिस का दल बल के बीच  मनमाने ढंग से काम करने की आज़ादी मिल जाती थी  सबसे पहले पहल एक छायाकार की तरह अखौरी प्रमोद होते तो पत्रकार के रुप में मेरी उपस्थिति होती थी. अमूमन होता यह था की दोपहर के बाद जब मैं उनके साथ औरंगाबाद लौटने  की तैयारी करता तब तक पटना या गया के दर्जनों पत्रकार और छायाकार मौके पर आ धमकते  तब live फोटो के लिए राजधानी के धुरंधर छायाकार भी इनके पीछे लग जाते थे.  कभी कभार तो वे लोग के आने से पहले यदि AP औरंगाबाद निकल गये तो ढेरों पत्रकार छायाकार इनसे फोटो के लिए इनके घर या छायालोक स्टूडियो में करबद्ध  हो जाते.


सबसे कमाल तो यह होता की अपने छायाकार सहोदरो  क़ो  देख कर अखौरी प्रमोद बिना बाइलाइन के प्रेशर के दुर्लभ फोटो सहज़ में दे देते.  हालांकि उनकी यह उदारता मुझे खलती थी मगर वे मुस्कुरा कर हमेशा यही संतोष कर लेते की कोई बात नहीं  फोटो मेरे पास यूहीं रहने से बेहतर हैं की वो छपे. यह बड़प्पन या उदारता मुझे अचम्भित करती थी .


 Ap के मन में संतोष और जोश भरा होता था सबो के लिए काफ़ी उत्साह के साथ संपर्क में रहना उनकी खासियत थी  Ap मेरे लिए एक थर्वामीटर  की तरह थे जिनको देखकर मैं अपनी काबलियत नकारापन और क्षमताओं के उतार चढ़ाव के ग्राफ का आंकलन करता या अपने बढ़ते चढ़ते सिकुड़ते मुड़ते टूटते कद क़ो देखता था  यह उनका बड़प्पन था कि  मेरा साधिकार किसी भी फोटो  के लिए निःसंकोच कह देना ही काफ़ी होता. पटना में मेरे कुछ ऐसे भी गुरु नुमा दोस्त बन गये थे जिनको कोई खबर की रुप रेखा बताने पर फोटो के साथ रिपोर्ट भेज देता था तो वही रिपोर्ट कभी आज पाटलिपुत्र प्रदीप ( बाद में यही प्रदीप हिंदुस्तान बन गया ) आदि कई अखबारों में छप जाती थी.


 ख़ासकर स्पलिंटर और ढेरों नये पुराने अखबारों में खबर छपवाने के लिए पटना के शर्मांजु किशोर मेरे सारथी बनकर मदद करते थे.  हालांकि शर्मान्नजू  किशोर से पहली और  आखिरी बार मैं 1996 में अहमदाबाद में मिला. इनपर तो काफ़ी कुछ कभी लिखा जायगा. मगर देव औरंगाबाद में रहते हुए हज़ारो रूपये के फोटो अखौरी जी  ने खींची थी. अमुमन पूरी खबर जिसे डिटेल भी कह सकते हैं के साथ फोटो मुझे लाकर देते. जिसे पटना के किसी मित्र के पास डाक से भेजकर किसी पेपर में छपने का इंतजार करता और छपी हुई रिपोर्ट क़ो देख कर ऐसा लगता मानो जन्नत  हाथ में हो


पटना के किसी अख़बार में अंशकालिक  या छपी हुई खबर के अनुसार मानदेय पाने वाला रिपोर्टर बनने का तो मौका नहीं मिला मगर 1987 में भारतीय जनसंचार संस्थान  (IIMC ) में स्नात्तकोत्तर पत्रकारिता डिप्लोमा करने का सुअवसर जरूर मिला. दिल्ली में नामांकन के साथ ही देव औरंगाबाद छूट गया. अपने ही गांव घर जिला में किसी मेहमान की तरह आता. कुछ लोग मिलते तो कुछ लोग से बिना मिले ही रिटर्न हो जाता. नौकरी बेकारी का सिलसिला जारी रहा. दर्जन भर नौकरी करने बदलने छोड़ने  छूटने के बावजूद 35 साल में 15 साल बेकारी के ही रहें.  हालांकि नाम शोहरत धन दौलत दर्जन भर किताबों सहित न्यूज़ एजेंसियो के लिए जमकर और खूब लिखा और पाया.दो तीन सज्जनों के लिए तो सैकड़ों रिपोर्ट लिखने के बावजूद धन नहीं मिला ख़ासकर किसी महिला से भी सुंदर संपादक रहें पत्रकार और साधु महंत बने माल मैथुन के रंगीले पत्रकार के संग छपने की भूख तो मिट गयी मगर धन पाना संभव नहीं हो पाया  इन दिवंगत पत्रकारों पर सच लिखना अब शोभा नहीं देता. मगर निठल्लापन में FANA न्यूज़ एजेंसी के सहयोग और अपनापन क़ो कभी भी भुला नहीं जा सकता. कोई 1990-91 के दौरान इसके संपादक  हर माह मुझसे पांच रिपोर्ट लेकर एक साथ 2000/- दे दिया करते थे. अक्सर मेरे बारे में पूछते रहते और मेरी निष्ठा क़ो देखते हुए हर माह छह रिपोर्ट लेकर एक साथ 3000/- देने लगे. FANA से जारी मेरी दर्जनों रिपोर्ट गल्फ टाइम्स सहित कई देशो के अखबारों में भी छपे. 1993 में फाना के बंद हो जानें के बाद मेरे आय का यह स्रोत भी बंद हो गया. 


नाना प्रकार के खट्टे मीठे अनुभवो के बीच मेरे मन में अखौरी प्रमोद सदैव जीवित रहे. जब कभी भी मन हताश होता या ठगा छला जाता तो मुझे अखौरी प्रमोद जी की याद आती  औरंगाबाद से रिटायर होने के बाद कोई 20 साल से भी ज्यादा समय  शहर छोड़े हो गये हैं इसके बावजूद जिले में उनकी पहचान और प्रियजनों की आज भी कोई कमी नहीं हैं मैं भी कोई 23-24 साल पहले उनसे मिला था. रिटायरमेन्ट के बाद वे फिर कभी औरंगाबाद आए या नहीं यह भी मैं नहीं जानता मगर औरंगाबाद बिहार वाले APसे ज भी के रांची झारखण्ड के हो जानें के बाद  सैकड़ों लोग आज भी AP क़ो पसंद करने वालों की कमी नहीं हैं 


2016 में कोई तीन माह तक रांची में रहा. रांची जानें की सूचना मैंने केवल अखौरी प्रमोद जी क़ो ही दी थी इसके बावजूद मुलाक़ात नहीं हो सकी दिल्ली के गंगाराम हॉस्पिटल में ईलाज के लिए भाभी क़ो लेकर भी आए मगर व्यस्तता लापरवाही और उदासीनता के चलते मैं हॉस्पिटल नहीं जा सका.  भाभी के दिवंगत होने की खबर भी तब मिली जब पंचतत्त्व में लीन होकर भाभी  अंतर्ध्यान हो गयी और सपरिवार वे लोग बिंन भाभी केवल उनकी यादों के संग खाली हाथ रांची लौट गये. 


 अखौरी जी का बेटा रुप बॉलीवुड में actor डायरेक्टर राइटर  सिनेमाटोग्राफर  हैं. अपनी अलग पहचान के लिए  जमकर काम क़ो नये ढंग से परिभाषित करने में लगा हैं इनकी छोटी बेटी मृणाल संगीत गायन अध्यापन और कार्यक्रम प्रस्तुति में लगी हैं  कार्यक्रमों की भीड़ में  उनकी अलग शानदार पहचान हैं तो बड़ी बेटी शालिनी केक गर्ल की तरह विख्यात हैं सैकड़ों स्वाद फ्लेवर और डिज़ाइन में केक से (के ) सृजन और स्वाद क़ो नया आयाम देने में शालिनी मशगूल  रहती हैं. केक का ऐसा चस्का की वो अपने फन या हुनर क़ो बड़ा आकाश देने की कोशिश से ज्यादा इर्द गिर्द के लोगों की वाह वाही से ही अपने धुन  में लगी हैं . 


वही अपने बाल बच्चों के खुशहाल जीवन से संतुष्ट कोई 80 साल के अखौरी प्रमोद में आज भी वही जोश जुनून ऊर्जा और काम के प्रति उत्साहजनक समर्पण हैं. उनसे मिलना कब मुमकिन होंगा यह तो मैं नहीं जानता मगर मोबाइल युग में अक्सर बातें हो जाती हैं. जिस समय मैं आज अखौरी प्रमोद जी क़ो याद कर रहा हूँ तो पत्रकारों से अकालग्रस्त रहें औरंगाबाद में आज दो एक नहीं सैकड़ों पत्रकार सक्रिय हैं प्रिंट से ज्यादा टीवी युग में खबरिया न्यूज़ चैनलों में ज्यादा oभीड़ हैं. जिले से एक नहीं बल्कि दो दो अख़बार छप रहें हैं. इतने पत्रकारों क़ो देख कर मेरा मन भी मुदित हो जाता हैं. हालांकि ज्यादातर पत्रकारों से मिला नहीं हूँ मगर अपने जिले के इन कलम बहादुरो क़ो देखने की तमन्ना जरूर हैं. ताकि मध्य बिहार के औरंगाबाद की धरती पर सक्रिय पत्रकारों से रूबरू होकर सबके बीच मैं खुद क़ो तलाश कर सकू.  फिलहाल अखौरी जी के सक्रिय जीवन और बेहतर सेहत की कामना हैं कि उनके बहाने ही मैं अपने उन दिनों की उन यादों की गलियों में चक़्कर काट रहा हूँ जहाँ के ज्यादातर पत्रकार अनजान होकर भी मेरे अपने सहोदर से प्रिय और अपने घर आँगन के ( से ) अपने हैं.


अनामी शरण बबल


8076124377 / 9312223412

शनिवार, 5 मार्च 2022

कर्क रेखा

 प्रस्तुति - कुमार सूरज 

कर्क रेखा उत्तरी गोलार्ध में भूमध्य रेखा‎ के समानान्तर 23°26′22″N 0°0′0″W / 23.43944°N -0.00000°E पर, ग्लोब पर पश्चिम से पूर्व की ओर खींची गई कल्पनिक रेखा हैं। यह रेखा पृथ्वी पर उन पांच प्रमुख अक्षांश रेखाओं में से एक हैं जो पृथ्वी के मानचित्र पर परिलक्षित होती हैं। कर्क रेखा पृथ्वी की उत्तरतम अक्षांश रेखा हैं, जिसपर सूर्य दोपहर के समय लम्बवत चमकता हैं। यह घटना जून क्रांति के समय होती है, जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य के समकक्ष अत्यधिक झुक जाता है। इस रेखा की स्थिति स्थायी नहीं हैं वरन इसमें समय के अनुसार हेर-फेर होता रहता है। २१ जून को जब सूर्य इस रेखा के एकदम ऊपर होता है, उत्तरी गोलार्ध में वह दिन सबसे लंबा व रात सबसे छोटी होती है। यहां इस दिन सबसे अधिक गर्मी होती है (स्थानीय मौसम को छोड़कर), क्योंकि सूर्य की किरणें यहां एकदम लंबवत पड़ती हैं। कर्क रेखा के सिवाय उत्तरी गोलार्ध के अन्य उत्तरतर क्षेत्रों में भी किरणें अधिकतम लंबवत होती हैं।[1] इस समय कर्क रेखा पर स्थित क्षेत्रों में परछाईं एकदम नीचे छिप जाती है या कहें कि नहीं बनती है। इस कारण इन क्षेत्रों को अंग्रेज़ी में नो शैडो ज़ोन कहा गया है।[2]

विश्व के मानचित्र पर कर्क रेखा


इसी के समानान्तर दक्षिणी गोलार्ध में भी एक रेखा होती है जो मकर रेखा कहलाती हैं। भूमध्य रेखा इन दोनो के बीचो-बीच स्थित होती हैं। कर्क रेखा से मकर रेखा के बीच के स्थान को उष्णकटिबन्ध कहा जाता हैं। इस रेखा को कर्क रेखा इसलिए कहते हैं क्योंकि जून क्रांति के समय सूर्य की स्थिति कर्क राशि में होती हैं। सूर्य की स्थिति मकर रेखा से कर्क रेखा की ओर बढ़ने को उत्तरायण एवं कर्क रेखा से मकर रेखा को वापसी को दक्षिणायन कहते हैं। इस प्रकार वर्ष ६-६ माह के में दो अयन होते हैं।[3][4]

शुक्रवार, 7 जनवरी 2022

कपालभाती केवल प्राणायाम नहीं!*

डॉ घोसालकर MBBS ने कपालभाती के विषय में अच्छी जानकारी दे रहें हैं !*    


*कपालभाती को बीमारी दूर करने वाले प्राणायाम के रूप में देखा जाता हैं!*


*मैंने ऐसे पेशंट्स को देखा हैं जो बिना बैसाखी के चल नहीं पाते थे!* 

*लेकिन* 

*नियमित कपालभाती करने के बाद उनकी बैसाखी छूट गई!* 

*और* 

*वे ना सिर्फ चलने बल्कि दौड़ने भी लगे.....!*


*01)* कपालभाती करने वाला साधक आत्मनिर्भर और स्वयंपूर्ण हो जाता हैं! 

कपालभाती से हार्ट के ब्लॉकेजेस् पहले ही दिन से खुलने लगता हैं! और 

15 दिन में बिना किसी दवाई के वे पूरी तरह खुल जाता हैं !


*02)* कपालभाती करने वालों के हृदय की कार्यक्षमता बढ़ता हैं!जबकि 

हृदय की कार्यक्षमता बढ़ाने वाली कोई भी दवा बाजार में उपलब्ध नहीं हैं !


*03)* कपालभाती करने वालों का हृदय कभी भी अचानक काम करना बंद नहीं करता

जबकि 

आजकल बड़ी संख्या में लोग अचानक हृदय बंद होने से मर जाते हैं !

     

*04)* कपालभाती करने से  शरीरांतर्गत और शरीर के ऊपर की किसी भी तरह की गाँठ गल जाती हैं! 


क्योंकि कपालभाती से शरीर में जबर्दस्त उर्जा निर्माण होता हैं! जो गाँठ को गला देती हैं! 

फिर वह गाँठ चाहे ब्रेस्ट की हो अथवा अन्य कहीं की


ब्रेन ट्यूमर हो अथवा ओव्हरी की सिस्ट हो या यूटेरस के अंदर फाइब्रॉईड हो

क्योंकि सबके नाम भले ही अलग हो लेकिन गाँठ बनने की प्रक्रिया एक ही होती हैं!  


*05)* कपालभाती से बढा हुआ कोलेस्टेरोल कम होता हैं! 

खास बात यह हैं कि मैं कपालभाती शुरू करने के प्रथम दिन से ही मरीज की कोलेस्टेरॉल की गोली बंद करवाता हूँ!

    

*06)* कपालभाती से बढा हुआ इएसआर

युरिक एसिड

एसजीओ

एसजीपीटी

क्रिएटिनाईन

टीएसएच

हार्मोन्स

प्रोलेक्टीन 

आदि सामान्य स्तर पर आ जाते हैं! 


*07)* कपालभाती करने से हिमोग्लोबिन एक महीने में 

12 तक पहुँच जाता हैं! 


जबकि हिमोग्लोबिन की एलोपॅथीक गोलियाँ खाकर कभी भी किसी का हिमोग्लोबिन इतना नहीं बढ़ पाता हैं! 


कपालभाती से हीमोग्लोबिन एक वर्ष में 16 से 18 तक हो जाता हैं!

महिलाओं में हिमोग्लोबिन 16 और पुरुषों में 18 होना उत्तम माना जाता हैं! 


*08)* कपालभाती से महिलाओं के मासिक धर्म की सभी शिकायतें एक महीने में सामान्य हो जाती हैं!  


*09)* कपालभाती से थायरॉईड की बीमारी एक महीने में ठीक हो जाता हैं!

इसकी गोलियाँ भी पहले दिन से बंद की जा सकती हैं !


*10)* इतना ही नहीं बल्कि कपालभाती करने वाला साधक 5 मिनिट में मन के परे पहुँच जाता हैं! 

गुड़ हार्मोन्स का सीक्रेशन होने लगता हैं!

स्ट्रेस हार्मोन्स गायब हो जाते हैं! मानसिक व शारीरिक थकान नष्ट हो जाती हैं! 

इससे मन की एकाग्रता भी आती हैं!


*कपालभाति के कई विशेष लाभ भी हैं!* 


*A)* कपालभाती से खून में प्लेटलेट्स बढ़ते हैं!

व्हाइट ब्लड सेल्स 

या 

रेड ब्लड सेल्स 

यदि कम 

या 

अधिक हुए हो तो वे निर्धारित मात्रा में आकर संतुलित हो जाते हैं!

कपालभाती से सभी कुछ संतुलित हो जाता हैं!

ना तो कोई अंडरवेट रहता हैं! 

ना ही कोई ओव्हरवेट रहता हैं!


अंडरवेट या ओव्हरवेट होना दोनों ही बीमारियाँ हैं! 

     

*(B)* कपालभाती से कोलायटीस

अल्सरीटिव्ह कोलायटीस

अपच

मंदाग्नी

संग्रहणी

जीर्ण संग्रहणी

आँव जैसी बीमारियाँ ठीक होती हैं!

काँस्टीपेशन

गैसेस

एसिडिटी भी ठीक हो जाता हैं!


पेट की समस्त बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं !


*(C)*  कपालभाती से 

सफेद दाग

सोरायसिस

एक्झिमा

ल्युकोडर्मा

स्कियोडर्मा 

जैसे त्वचारोग ठीक होते हैं!


स्कियोडर्मा पर कोई दवाई उपलब्ध नहीं हैं! 


लेकिन यह कपालभाती से ठीक हो जाता हैं!


अधिकतर त्वचा रोग पेट की खराबी से होते हैं! 

जैसे जैसे पेट ठीक होता हैं ये रोग भी ठीक होने लगते हैं !


*(D)*  कपालभाती से छोटी आँत को शक्ति प्राप्त होती हैं!


जिससे पाचन क्रिया सुधर जाती हैं!


पाचन ठीक होने से शरीर को कैल्शियम

मैग्नेशियम

फॉस्फरस

प्रोटीन्स 

इत्यादि उपलब्ध होने से 

कुशन्स

लिगैमेंट्स

हड्डियाँ ठीक होने लगती हैं! 

और 

3 से 9 महिनों में 

अर्थ्राइटीस

एस्ट्रो अर्थ्राइटीस

एस्ट्रो पोरोसिस 

जैसे 

हड्डियों के रोग हमेशा के लिए ठीक हो जाते हैं !


*ध्यान रखिये की* 

*कैल्शियम प्रोटीन्स हिमोग्लोबिन व्हिटैमिन्स आदि को शरीर बिना पचाए बाहर निकाल देता हैं!*


*क्योंकि केमिकल्स से बनाई हुई इस प्रकार की औषधियों को शरीर द्वारा सोखे जाने की प्रक्रिया हमारे शरीर के प्रकृति में ही नहीं हैं !*


*हमारे शरीर में रोज 10 % बोनमास चेंज होता रहता हैं!*


*यह प्रक्रिया जन्म से मृत्यु तक निरंतर चलती रहती हैं!*


*अगर किसी कारणवश यह बंद हुई तो हड्डियों के विकार हो जाते हैं....*


*कपालभाती इस प्रक्रिया को निरंतर चालू रखती हैं!*


*इसीलिए कपालभाती नियमित रूप से करना आवश्यक हैं !*


*सोचिए यह सिर्फ एक क्रिया कितनी लाभकारी हैं!*


*इसीलिए नियमित रूप से कपालभाति करना एक उत्तम व्यायाम की प्रक्रिया हैं!!*


*👉🏽  परहितार्थ यह पोस्ट सभी ग्रुपों में सेण्ड करें  !*

🙏🌹🙏

मंगलवार, 4 जनवरी 2022

आदते बेहतरीन जीवन के लिए

 *1.* प्रतिदिन 10 से 30 मिनट टहलने की आदत बनायें. चाहे समय ना हो तो घर मे ही टहले , टहलते समय चेहरे पर मुस्कराहट रखें.


               *Secure Health*


🌟 *2.* प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट चुप रहकर बैठें. 


               *Secure Health*


🌟 *3.* पिछले साल की तुलना में इस साल ज्यादा पुस्तकें पढ़ें.


               *Secure Health*


🌟 *4.* 70 साल की उम्र से अधिक आयु के बुजुर्गों और 6 साल से कम आयु के बच्चों के साथ भी कुछ समय व्यतीत करें.


               *Secure Health*


🌟 *5.* प्रतिदिन खूब पानी पियें.


               *Secure Health*


🌟 *6.* प्रतिदिन कम से कम तीन बार  ये सोचे की मैने आज कुछ गलत तो नही किया.


               *Secure Health*


🌟 *7.* गपशप पर अपनी कीमती ऊर्जा बर्बाद न करें.


               *Secure Health*


🌟 *8.* अतीत के मुद्दों को भूल जायें, अतीत की गलतियों को अपने जीवनसाथी को याद न दिलायें.


               *Secure Health*


🌟 *9.* एहसास कीजिये कि जीवन एक स्कूल है और आप यहां सीखने के लिये आये हैं. जो समस्याएं आप यहाँ देखते हैं, वे पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं. 


               *Secure Health*


🌟 *10.* एक राजा की तरह नाश्ता, एक राजकुमार की तरह दोपहर का भोजन और एक भिखारी की तरह रात का खाना खायें.


               *Secure Health*


🌟 *11.* दूसरों से नफरत करने में अपना समय व ऊर्जा बर्बाद न करें. नफरत के लिए ये जीवन बहुत छोटा है. 


               *Secure Health*


🌟 *12.* आपको हर बहस में जीतने की जरूरत नहीं है, असहमति पर भी अपनी सहमति दें.


               *Secure Health*


🌟 *13.* अपने जीवन की तुलना दूसरों से न करें.


               *Secure Health*


 

🌟 *14.* गलती के लिये गलती करने वाले को माफ करना सीखें.


               *Secure Health*


🌟 *15.* ये सोचना आपका काम नहीं कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं.


               *Secure Health*


🌟 *16.* समय ! सब घाव भर देता है. 


               *Secure Health*


🌟 *17.* ईर्ष्या करना समय की बर्बादी है. जरूरत का सब कुछ आपके पास है. 


               *Secure Health*


🌟 *18.* प्रतिदिन दूसरों का कुछ भला करें. 


               *Secure Health*


🌟 *19.* जब आप सुबह जगें तो अपने माता-पिता को धन्यवाद दें, क्योंकि माता-पिता की कुशल परवरिश के कारण आप इस दुनियां में हैं.

               *Secure Health*


🌟 *20.* हर उस व्यक्ति को ये संदेश शेयर करें जिसकी आप परवाह करते हैं..l💞🌷🌹🙏🏻🙏🏻