रविवार, 31 जुलाई 2016

प्रेम / अनामी शरण बबल





अनामी शरण बबल

प्रेम 1

न जाने
अब तक
कितने/ दिलवर मजनू फरहाद
मर खप गए
(लाखों करोडों)
बिन बताएं ही फूलों को उसकी गंध
चाहत की सौगंध / नहीं कर सके इजहार
उनका दिल भी किसी के लिए
धड़कता था।
एक टीस मन ही मन में दफन हो गयी 
फिर भी / करता रहा आहत
तमाम उम्र ।
बिन बोले ही
एक लावा भूचाल सी
मन में ही फूटती रही
टीसती रही
अपाहिज सपनों की पीड़ा 
कब कहां कैसे किस तरह
मलाल के साथ  
मन में ही टिकी रही बनी रही
काश कह पाते / कह पाते कि
दिल में तुम ही तो धड़कती थी
हमारे लिए



2 

मेरे सपने
अपाहिज नहीं यह जाना
सालो-सालों साल सालो साल के बाद। 
मेरा सपना अधूरा भले ही रहा हो
मगर दिल का धड़कना
सांसो का महकना या फूलों का देखा अनदेखा सपना
अधूरा नहीं था।
तोते की तरह
दिल रटता ही रहा
दिल की बात
कोयल भी चहकी और फूलों की महके
हवाओं ने दिए संकेत रह रहके
दिल की बात दिल जानती है।  

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