मंगलवार, 24 अक्तूबर 2017

कुछ अधूरी प्रेम कविताएं अनामी शरण बबल








मैं तेरा झूठा 

अनामी शरण बबल 

1
मान लेना भी अक्सर
हैरान कर देता है मुझे बारबार
लगता मानो बादलों में
परियों के संग खेल रहा
बादलों से घिरा मैं अचंभित बार बार
रेत में फूल खिला हो, मानो परियों.से दिल मिला हो
ऐसा भी होता है यह नहीं सोचा था
पाने का स्वप्न पराया लगता है
मैं तेरा साया सा
यह ख्वाब भी पराया लगता है।

2
करके आंखे बंद
जब भी बैठता हूं तेरे ख्याल में
लोग बाग इसे ध्यान उपासना मान लेते है।
मैं तो कहीं और खोया रहता हूं ख्यातों में
केवल होती है संग मेरे
उसका अहसास उसकी रौशनी उसका संगीत
पौ फटने सी है उसकी पावस प्रकाश
दिखता है उसमें तेरा नूरानी चेहरा
 तेरी माया तेरी काया

3

रह रहकर मैं खुद से ही खुद में
खुद पर / हो अचंभित
हंसने लगता हूं अक्सर ।
अपनी ही नजर में फंसने लगता हूं।
रह रह कर बार बार
कोई खुश्बू फैल जाती है
आस पास / पास पास / बार बार हर बार  मानो
किसी की याद में खोया
कोई मीठी याद सी
धूप सहलाकर मुझे
चली गयी हो
बारबार
अक्सर देखते ही लोग मुझे
खिल जाते हैं,
किसी मोहक संगीत में झूम से जाते हैं।
तुम्हारी याद में अक्सर 
बावला सा मैं / मचल उठता हूं खुद में ही
अपनी भी अब
परवाह नहीं रहती मुझे
कोई चाह नहीं रहती।।

4

मैं
मैं तावे सा गोर
और तू चांद सितारों सी
मैं कोयले सा बेनूर
तू फूल गुलाब हजारों सी
घनघोर करिया अंधकार की लंबी गुफा मै
तू सूरज सी प्रकाशमान / प्रकाशवान
मैं मलीन शाम सा
तेरा चेहरा ऊज्जवला दिनमान
पाकर खुश्बू
उल्लासित मन की  मोहक रेखा
यह मेरा सौभाग्य
कुदरत की नजर से
मैने बार बार हर बार देखा ।।

5

धूप हवा जल मिट्टी आग मे
पहचान के हर पल उल्लास में
बस केवल तू ही तू है
मिट्टी
जिसमें रचा बसा लेटा खेला और पवन में उड़ता।
 



6


मैं तेरा झूठा
बोल रहा हूं एक झूठ
और कहीं से
अपने ही भाव की करके चोरी
टू लाख कहे या चाहे मगर
नहीं उतरेगा यह खुमार
दिन रात
धरती आकाश पहाड़ सागर की तरह
चमकता रहेगा यादों का अमरप्रेम / अमरबेल
सूरज चांद की तरह
कोई रहे ना रहे
क्या फर्क पड़ता है । 
हवाओं में गूंजती रहेगी प्रेम की खुश्बू
खंडहरों घाटियों में महकेगी
तृप्त प्यार की मोहक गंध
तेरी सौगंध
नहीं उतरेगा
कभी नहीं उतरेगा प्यार का रंग
मैने तो रंगों में ही डाल दी है
अपना प्यार अपना खुमार
अपनी खुशी अपना बहार अपना नाम। ।.।


7


सच में नहीं उतरेगा
कभी नहीं और कभी नहीं
तू लाख कर ले जतन
हमारे बाद भी रहेगा प्यार मन से जतन से
हर किसी की मुस्कान में होगी
तेरी ही खिल खिलाहट
खिला खिला सा होगा
हर चेहरे पर तेरी मुस्कान
हर सिंदूरमें होगा
तेरा संतोष तेरा सौभाग्य तेरा आशीष 
मैं तो दूर का वासी
नयन से देख न सकूं कभी
फिर भी रोजाना ही देखता हूं तुझे
मन से दिल के नयन से
जी भर होकर तृप्त संतुष्ट  
फिर भी
नयनों में आस बनी रहती है
चाहत की प्यास जगी रहती है ।।.  

8

किसी की याद में जीना / किसी की याद से जीना
किसी की याद में मरना
किसी की याद में रहना।
किसी की याद को सहना / किसी की याद से दहना
किसी की याद को कहना, याद में बहना
अब तो अपनी आदत है।
मैं पागल ना आशिक दीवाना
केवल मस्ताना /यादों में यादों से बावला।


9



मन में  
फिर भी मन में नाचें एक दो नहीं हजारों छवि
रंग बिरंगी
मोहक एक ही सूरत मूरत
दिल में बस गयौ
जिसे निकाल नहीं पाता
ना ही नयन फेरत बने
हरदम मन में बसी रहे
तू चाहे तो मना करै या जा सकौ।
मैं न रोक्यौ तूझे कभी
दिल पे हाथ धर के कहता हूं तुमसे
तू चाहो तो जा सकत है
मगर मैं कहूं तुझसे
मैं कहां जाऊं भला तेरी यादों से होकर दूर।
ई ना हो सकत मुझसे  /चाहे जान चली जाए भली
 हो ना सक्यौ मुझसे ई कभी।
ना रोकू मैं तुझको  
गर तू चाहत है जान भली
सच कहत हूं गोई
तू मान ले इसको झूठ।  
मैं झूठा तेरा
मुझमौं कहां प्रीत की ऐसी आंच भला
खुद की अगन में हो निहाल रहूं मगन मैं .
मेरी अगन तो मुझे निखारे
तपन तपाकर कंचन कर दे बदन
तेरी याद की नरम शीतल छांह
कर दे सब कुशल मंगल ।

मुझमें ना इता जतन
मैं तेरी छाया
तुझमें है इतनी मेरी तडप / तू मेरी छाया
याद तेरी कवच
कुछ ना होय मुझे / मैं  हरदम हर गम से चंगा
मैं झूठा तेरा
और तू सबसे बड़ी सच मेरी
सबसे बड़ी सबसे बड़ी सबसे बड़ी।।

10


पागल नहीं ना आशिक दीवाना
फिर भी रहता है बहुत बेताब ए दिल
मन के भीतर ज्वार उठे आंखों में खुमार दिखे
दिल सागर सा धीर मगर उसमें सैलाब ए दिल
फूल खुश्बू पर चंचल भ्रमर बेहाल
मन को रोकना मुश्किल लगे / दिल भी कातिल सा बेदिल लगे 
कोई चांद झिलमिलाए ऐसा ही है ख्वाब ए दिल
पहली पहली बार मन में उठे तूफान  
चारो तरफ मानो खुशियों का उफान
नूर की कोहिनूर सी चमक सोने नहीं दे
मन उपवन की तडप रोने नहीं दे
झलक पाने की ललक / दिल को खोने नहीं दे
जानत हूं हाल मगर मैखाने का हलाहल शराब ए दिल
अधीर होकर भी काबू में रहना है सब मन में सहना है
उसकी मोहकता का यही माहताब ए दिल
मैं तेरा झूठा दिल में है कोई पुरानी शराब ए दिल


11

कभी नहीं सोचा था
कभी नहीं और कभी नहीं
रेगिस्तान में भी फूल खिलेंगे
कभी धरती आसमान मिलेंगे ?
सच
ऐसा ही लगता है मानो
मैं खुद से मिल रहा हूं
मेरा ही कोई साया है
न जाने / किसकी काया में है ?

कभी नहीं थी बात बेबात मुलाकात 
नहीं कभी हुए
आमने सामने
नेह स्नेह अपनापन प्रेम चाहत की भी
नहीं कहीं गुंजाईश
कभी नहीं देखा था ख्वाब
मेरे वन में कोई होगा गुलाब
बात व्यावहार मान मनुहार ।

मैं भीड़ से घिरा तन्हा
कोई नहीं जिसे अपना मानू
भले ही सपना सा जानू
किसी पर कोई अधिकार सा देखू।.।
मैं झूठा तेरा
जानता हूं धरती आकाश सा हूं अलग अलग
फिर भी नहीं लगता है
यह अहसास ही दिल के पास लगता है
 मैं झूठा तेरा
मन में एक विश्वास सा लगता है।


12


वो चेहरा कोहिनूर है
जिसकी याद में खो
मेरी आंखों में हरदम उसकी छवि
आंखों के झील में खोया डूबा हूं।
चाहत का ऐसा नूर
जिससे मैं बहुत दूर
जिसके खोने से लगे बेनूर अपनी दुनियां
लहरों सी चपल मस्त  / फूलों की महक सी
नूर को देख ही लेता हूं
रोजाना
होकर खुद को खोकर मुग्ध विभोर

नहीं मलाल दूरी की   / मजबूरी की
किसी बेताब हूर सी परी सी
कोहिनूर की चमक दमक और भरपूर लिए ललक
मेरे सामने आकर खड़ी हो जाती है
अक्सर
उसकी चमक से ही
रौशन है मेरा घर
कभी नहीं चमक धूमिल
तेरे नूर से / हरदम खिला खिला मेरा जहां ।

ना रिश्ता ना बंधन फिर भी चाहत भरा आकर्षण
यही एक बंधन है कोहिनूर से
कुछ ना होकर भी / सबकुछ लगे दूर से।

मन से मन की यह मानो मुलाकात
तुमं मेरे लिए ईश्वर प्रदत सौगात हो
कोहिनूर से भी हो तुम / ज्यादा निश्छल उज्जवल
पाक बेदाग सुदंर
यही मन की ललक है चाहत है वचन है ।।


14

क्या तेरे संग भी होता है / कुछ ऐसा ही
या केवल मेरा
भरम है करम है
या पागलपन ।

मन बेकाबू तेज धार सी
मन का बंधन तेज कटार सी
तेरा रंग रूप चमक सौंदर्य तलवार सी
तुम पर मन समर्पित पावन वंदनहार सी
हरदम हर पल
पलपल दमके नयनों मे तेरा श्रृंगार / मंत्र मुग्ध सा मन करे केवल तेरा निहार 
सागर सा शांत रहूं मैं बैठा 
मन के भीतर तेज तूफान उफान
फिर भी केवल तेरी याद / तेरा चेहरा ही खेवनहार
मन मे रहे केवल विश्वास
फिर सब कुछ शांत परास्त सा  सामान्य लगे
दिल के तूफान का
ना होय किसी को भान
मैं तेरा झूठा
कहयो केवल एक बान
यही तोर मान
और ऊ
तोर सम्मान।
उर्फ
(यही तेरा मान
तू मेरा स्वाभिमान ।)


15


दिन भर हरदम कहीं ऐसा भी होता है
जिधर देखू तो केवल
तूही तू नजर आए।

हर तरफ मिले खिसी फूल सी खिली खिली
पूलों में बाग में फलो में गुलाब में
मंदिर मे जल प्रसाद में शराव में
तूही तू नजर आए।।

बाजार में दुकान में / हर गली  और मकान में
कभी आगे तो कभी साथसाथ
जिधर देखू
तूही तू नजर आए ।।।

सुबह की धूप मे किसी के संग किसी रंग रूप में
शाम को कभी दोपहरी कभी कहीं किसी मंदिर स्तूप में   को
रोजाना / कई कई बार
आकर सांकल घनघना देती हो
खिड़की पर कोई गीत गुनगुना देती हो
एक नहीं कई बार हर तरफ
तूही तू नजर आए।। ।।
मन खिल खिल जाए। 


16

मैं तेरा झूठा
ना बोल्या सच कभी
पर कभी कभी लागे मुझे झूठ ही बन जाए मानौं सच
दिल की जुबान / दिल की बात /  मन की मुलाकात
तेरी सौगंध खाकर तो कभी ना बोलूं झूठ
ई तू भी जानैं
पर क्या करे तेरी सौगंध
हर समय तेरी मोहक गंध मुझे सतावे
चारो तरफ से आवैं
मुझै हाल बता जाए  
बेहाल नहीं /सुजान बना जावै।
दूर दूर तक कोई नहीं / कोई नहीं
केवल तन मन की खुश्बू
दिल की आरजू
मोहे सुनाय
कहीं भी रहो
पायल हर बार तेरी आहट दे जाए
कोई गीत गुनगुना जाए
मंदिर की घंटियों की झनक
तोर हाल बता जाए।
तेरी आहट से पहले / तेरी गंध करीब आ जाए
रोजाना / हर पल हर क्षण ।







98

ईत्ती उमर गुजर गयौ
तबे जाकर हुआ अहसास
भूल गया था मानो अपने ही जीवन में  कुछ खास
अब लागौ मुझे
हर सांस में है एक बंधन
हवा मानौ फूल से कहे
पती पती धूप सहे
बर्फ पीकर भी चांदनी
जाड़े में मस्त रहे
फूल कब करे कोई उलाहना धूप से
निगाह कब फेरौगे मेरे रूप से
का करे कुछ अईसन ही लागे
ईते उमर के बाद
मन में फूटल है अंगार
पता नहीं लोगन कि का कहे का जाने
मन में है मधुमास हरसिंगार
मन में है एक फांस
हर सांस के साथ। हर सांस साथ।।


99

तू ना बोले झूठ कभी
और मैं ना बोलू सच
आज
तू ही बन जा मेरी जज
बिन तेरे निक न लागे कछू
सबै लगे उदास
मैं पागल खोजत रहयौ
हर नूर में केवल तेरा अहसास
कोई कहे मोहे पागल पर जानत हूं मैं
तू भी है भीतर से घायल
मैं कहूं तो से
ई है नेह का बंधन अपनापन
अब तू ही बोल
का है ई
जो कहौ सब सिर माथे.।।

100

एक बात की सौ बात
और सौ बात की एक सुनो
एक ही ठीक लागे,
तू मुझे हरदम हरपल
सबसे नीक लागे
तेरी मौन सुहावन छवि भी
कभी कभी तो अभी अभी भी एक सीख लागे
मनभावन सब बात कहूं मैं तुमसौ
फिर भी दाव यही भारी लागे
तू आज और कल भी
चितचोर चितवन
नयनों को सबसे न्यारी प्यारी लागे ।।

अनामी शरण बबल 






अपना प्यार भी गंगाजल है



 

 केंचुल में यादें / अनामी शरण बबल

1

a
मैं किसी की याद के केंचुल  में हूं
अस्स बस्स , लस्त पस्त
चूर किसी मोहक सुगंध से
नशा सा है इस केंचुल का
निकल नहीं पा रहा
यादों के रौशन सुरंग से
जाग जाती है यादे मेरे जागने से पहले
और सो नहीं पाती है तमाम यादें
 मेरे सोने के बाद भी
मोहक अहसास के केंचुल से
नहीं चाहता बाहर आना
इन यादों को खोना
जो वरदान सा मिला है
मुझे
अपलक महसूसने को ।



2
केंचुल में यादें

नहीं नहीं सब कुछ 
उतर जाता है एक समय के बाद
पानी का वेग हो या आंधी तूफान
चाहे सागर का सुनामी
लगातार उपर भागता तेज बुखार
आग बरसाता सूरज हो
या
चांदनी रात की शीतलता
कुछ भी तो नहीं ठहरता
सदा -सदा-सदा  के लिए ।।

केंचुल से भी तो एक दिन 
हो जाएगी बाहर सर्पीली यादें
हवा में बेजान खाली केंचुल भी        
यादों पर बेमानी है।।
नहीं उतरेगा मेरा खुमार
दिन रात धरती पहाड़ की तरह
चमकता रहेगा यादों का अमरप्रेम
सूरज चांद की तरह
कोई रहे ना रहे
क्या फर्क पड़ता है  
हवाओं में गूंजती रहेगी प्रेम की खुश्बू
खंडहर घाटियों में महकेगी
प्यार की मोहक गंध
प्यार की अपनी यादों पर
केंचुल नहीं
केंचुल में डाल दी है अपनी तमाम यादें
फूलो की तरह पेड़ों की तरह
जबतक रहेगी हवा मे खुश्बू
अपना प्यार भी धूप की तरह
दमकता चमकता महकता रहेगा 
तेरी तरह
मेरे लिए तेरे लिए
हमारे लिए
 सदा सदा सदा सदा सदा 
 सदा के लिए हरदम हरपल।      


 2


मेरी यादों में तैरती है हरदम
एक मासूम सी शांत
लड़की
चंचल कभी नहीं देखा
हमेशा अपलक गुम सी निहारते
उदास भी नहीं
पर मुस्कान बिखेरते भी नहीं पाय
हरदम हर समय खुद में ही खोई
एक शांत सी लड़की
मेरी आंखों मे तैरती है
 किसी की तलाश में
या अपनी ही तलाश में
फिर भी यादों में बेचैन रहती है
एक लड़की खुद अपनी तलाश में 

3

एक चेहरे की मोहक याद
जिसको महसूसते ही मन गुलाब सा खिल जाता है
खिल जाता है मन
अनारकली की तरह सलीम को देखकर
मुझे तो उसके चेहरे का भूगोल भी ठीक ठीक याद नहीं
याद है केवल एक सुदंर फूल की खुश्बू
जिससे मन हर भरा सा लगता था
चाहत से ही तन मन भर उठता था मुस्कन से
चिडियों की तान सी जब भी देखा दूर से
नहीं देखा तो कभी
आमने सामने - आस पास -करीब
फिर भी मोहक गंध सी लगी
किसी ऐसी सौगंध सी लगी
जिसे पार पाना  
नहीं था मेरा कोई अधिकार

  4


किसी कसक की तरह हमेशा
वो मन में टिकी रही
ना होकर भी उम्मीद सी मन में जगी रही
रंग धूमिल होकर भी यादें मन में चहकती रही
कैसा होगी और कहां ?
 जानने की आस रही
भूल गए हो शायद (दोनों)
इसकी भी टीस हरी रही
मन के दरवाजें पर एक आस अड़ी रही 
पास पास ना होकर भी
मन में साथ की याद रही।
रहो हमेशा हर दम हर पल
खुशी में महकती खिलखिलाती रहो 
ऐसी ही मन में कुछ फरियाद रही।


5

कोई कैसे अपना सा लगने लगता है
इसकी चाहत भी तब जागी
जब दूर हो गए  मजबूर से हो गए
देखने की तमन्ना भी तब उठी सीने मे
जब देखना भी ना रहा आसान
पाने की ललक भी मुर्छा गयी देखकर दूरी
तन मन रहन सहन की
फिर भी कोई कैसे मांग ले फूल को अपने लिए
जाने बिना
धड़कन की रफ्तार
महक की धार ?



6

यह कौन सा नाता है
न मन का न नयन का
केवल चाहत है धड़कन का
बिन देखे बिन बोले बिन कहे सुने
कौन गिने सुने इस दुख की पीर
जिसमें 
कुछ नहीं है न टीस न यादों की पीड़ा न विरह का संताप
है केवल मन का मोह मन की ललक
यादों को सहेजने का जतन
यादों में बने रहने का लगन
खुद को खुद से खुद में
खुश रखने का अहसास 


7

किन यादों को याद करे मन
नहीं है कहीं स्पंदन
चाहत का है केवल एक बंधन
यादों के लिए भी तो कुछ चाहिए मीछे पल
केवल चेहरे को याद करके निहाल हो जाना
फिर बेहाल रहना
जाने बगैर कि आंधी किधर है
मन में या धड़कन में


8

तुम्हारे होने भर के ख्याल से ही
मन भर जाता है
खिल जाता है
लगता है मानों
मंदिर की घंटियां बजनेलगी हो
या
कोई नवजात
अपनी मां से लिपट
पाने लगा
सबसे सुरक्षित होने का अहसास   
तुम्हारे ख्याल से ही
लगता है अक्सर
उसको कैसा लगता होगा  
क्या मैं भी कहीं हूं
किसी की याद में ?


9

किसी की याद में रहना
या
याद बनकर ही रह जाना
बड़ी बात है।
यादों के भूत बनने से बेहतर है
यादों की ही मोहक स्पंदन से
ताकत देना उर्जा लेना ।
याद में रहकर भी सपना नहीं
अपना होकर भी अपना नहीं
मन से हरदम पास होकर
साथ का शिकवा नहीं
बड़ी बात है।


10

कुछ ना होकर भी
हम सबकी चाहत एक हैं
 एक ही साया है दोनों के संग
हर समय
मन में तन मे
एक ही तरंग उमंग
फासला भी अब हार नहीं
जीत सा लगता है
दिल के धड़कन का संगीत सा लगता है
पास ना होकर भी
पास का हर पल
प्यारा दीवना सा लगता है
जेठ का मौसम भी सुहाना लगता है।


11
यह अंधेरे का कोई  
गुमनाम बदनाम सा नाता नहीं
यह तो दिल और मन का बंधन है
मेरी यादें बेरहम कातिल नहीं
नफरतों सा बेदिल नहीं
हमारी यादों में फूलों की महक है,
चिडियों की चहक है
 अबोध बच्चे का मां से आलिंगन है
हमारी यादें तो मां के चुबंन सी निर्मल है  
प्यार अपना भी गंगाजल है
तेरे चेहरे पर हरदम
मुस्कान की शर्त है
तभी तुम्हारे होने का अर्थ है
तेरी हर खुशी से भी प्यार है
वही तेरे जीवन का श्रृंगार है
यादों में बनी रहो, हरदम हरपल
शायद
यह मेरा अधिकार है।

12

करते ही आंखे बंद 
जाग जाते हैं मन के सारे प्रेत
आंखों के सामने सबकुछ घूम रहा होता हैं
सिवाय तुम्हारी सूरत
जिसकी याद में
लीन होने के लिए
 मैं करता हूं 
अपनी आंखे बंद  

13

 यह कैसी नटलीला है प्रभू 
खुली आंख में सूरत नहीं दिखती 
बंद आंख मे भी 
सूरत की याद नहीं आती 
याद करके भी 
 याद नहीं कर पाता
मोहक चेहरा
कि मन को 
शांति मिले
या शांत मन में कोई उपवन खिले
इतना जटिल क्यों है
याद को याद करना
जिसके लिए मन हरदम हरपल 
विचलित 
सा रहता है 
बार बार 
फिर भी याद  है कि आती नहीं 
 और 
मोहक सूरत दिखती नहीं ।



14


तुम्हारे होने भर के
अहसास से
भर जाता है
मेरे मन में
धूप चंदन की महक
खिल जाते हैं मन आंगन उपवन में  फूल

जाड़े की धूप से नहा जाता है पूरा तन मन
नयनों में भर जाती है
तृप्ति का सुख
चेहरे पर बिखर जाती है मुस्कान
रोम रोम होकर तरंगित
मन तन बदन को करता पुलकित
होकर सांसे तेज
देखता आगमन की राह   
बिह्वल हो
मैं भी मोहक अहसास
बनकर देखने लगता हूं
अक्सर
उस अहसास की उर्जा
गंध तरंग को
जिससे मेरा तन मन पूरा बदन  
रोमांचित होकर
खो जाता है मोहक मीठे खवाब में

15

यह  नहीं है 
दीवनापन या पागलपन
फिर भी 
हर तरफ केवल 
तू ही तू और तेरा ही चेहरा
क्यों नजरा आए
स्कूल जाती बच्चियां हो 
या गांव के पनघट पर शोर मचाती 
हंस हंस कर देती उलाहनों की 
मुस्कान में भी तेरा ही चेहरा 
हर चेहरे पर मुस्कान और संतोष है 
मिठास के साथ 

तेरे ही रंग में 
 हर चीज मीठी मादक दिखती है
तेरे ही संग खिलता है सूरज 
और पलकों पर उतरने को बेकरार रहता है चांद
निर्मल पावन मंदिर की घंटियों सी तुम  
मन में गूंजती हो 
यादें मोहक सुहावन रहे मन की लालसा है 
तुम्हारा सुख निर्मल शांति ही मेरी अभिलाषा है 
मैं तो हवा की तरह हर पल हूं 
यही सुख है 
यादों के बचपन में
यादें भी रहे बचपन सी 
कोमल पावन
किसी अबोध बच्चे कीतरह 

  16

1


अनजाना अनदेखा
चेहरा ही दिखाता है

बार बार बार बार बार
कभी मन से नयन से
औरों की भी नजर से
देख ही लिया जाता है
अनदेखी छवि सी कली को
ललक भरी रुमानी रेखा।

यही तो चाहत है
उस मोहक याद की
जिसको 
हर बार नए नए नए नए
नए तरह से देखता है मन
कल्पना की गंध में
हर बार
अनूठापन नयापन
मोहक ख्याल से ही
कोमलता खिल जाती है चेहरे की
 चांद भी शरमाता है
शांत चेहरे की नूर से
दूर होकर भी सिंदूरी चेहरा
हर पल खिला खिला
रहता है
हर क्षण दिल से कुछ तो मिला होता है
चेहरे की चमक से
चांदनी रात भी
शरमाती है
बिन देखे ही चेहरे की
मिसरी सी मोहक याद सताती है।

2
और 
बढ जाता है मोहक खुमार
देखने के बाद
ख्यालों में खोए खुमार
में ही
मिट जाता है अंतर
देखे और बिन देखे का
जिंदा होता है
केवल
ललक उमंग उत्साह की उन्मादी खुशी ।।

3
मेरी बात  

मेरे सपने
अपाहिज नहीं यह जाना
सालो-सालों साल दर साल के बाद। 
मेरा सपना अधूरा भले ही रहा हो
मगर दिल का धड़कना
सांसो का महकना या फूल संग देखा अनदेखा सपना
अधूरा नहीं था।
तोते की तरह
दिल रटता ही रहा
दिल की बात
कोयल भी चहकी और फूलों की महके
हवाओं ने दिए संकेत रह रहके
मगर अपना दिल
दिल की बात
दिल तक दिल को देखनहीं पाया ।


प्रेम -1
न जाने
अब तक
कितने/ दिलवर मजनू फरहाद
मर खप गए
(लाखों करोडों)
बिन बताएं ही फूलों को उसकी गंध
चाहत की सौगंध / नहीं कह सके
उनका दिल भी धड़कता था
किसी के लिए ।
एक टीस मन ही मन में दफन हो गयी 
फिर भी / करता रहा आहत
तमाम उम्र ।
बिन बोले ही
एक लावा भूचाल सी
मन में ही फूटती रही
टीसती रही
अपाहिज सपनों की पीड़ा 
कब कहां कैसे किस तरह
मलाल के साथ  
मन में ही टिकी रही बनी रही
काश कह पाते / कह पाते कि
दिल में तुम ही तो धड़कती थी
हमारे लिए

दिल 

दिल से दिल में
दिल के लिए
दिल की कसम खाकर
दिल ने
दिल की बात कह ही दी
तू बड़ा
बेदिल है।। 
 b 

हंसकर दिल ने 
दिल में ही 
दिल की कर शिकायत 
दिल के लिए 
कसम खाकर
दिल में कहा  
और तू बडी कातिल है।


 फिर हंसकर
दिल ने दिल से कह डाला
दिल में मत रख बात
तू कह दे तू कह ही दे
दिल से ही दिल मिलते हैं
सपनों के फूल खिलते हैं
दिल में ही तड़प होती है
पर एकटक मौन शांत रहा दिल
तब खिलखिला कर बोली दिल
तू बड़ा बुजदिल है।।



विश्वास
 
अर्थहीन सा लगे जग सारा
जब कोई मुझसे रूठ जाए।
बेकार से लगे जग सारा
जब कोई मुझसे ही नजरें चुराए।
बेदम सा मन हो जाए
जब अविश्वास से मन भर जाए किसी का ।
तमाम रिश्तों को
केवल विश्वास ही देता है श्वांस ((ऑक्सीजन)
सफाई जिरह तर्क कुतर्क सवाल जवाब से
होता है विश्वास शर्मसार
जिसको बचाना है
बहुत जरूरी है बचााना  
कल के लिए
प्रेम के लिए
सबके लिए।।



केवल सात

मेरी यादों के रंग हजार
और इंद्रधनुष में केवल सात ?
नयनों के भीतर अश्क की असीम दरिया
और दुनियां में महा सागर केवल सात ?
कंगन चूड़ी बिछुआ पायल बाली बदल के धुन बेशुमार
और संगीत साधना के सूर केवल सात
उसके घरौंदे में अनगिन कक्ष (कमरे)
और रहने को दुनियां में  महादेश केवल सात ।।
अब शिकायत भी करे
तो क्या 
 किससे किसके लिए।।।।

इंतजार

रंगीन यादों की मोहक तस्वीरें
देख गगन पर इंद्रधनुष भी शरमाए
तेरे स्वागत में
रोज खड़े होते हैं मेरे संग संग
कोयल मैना गौरेया तोता टिटिहरी की तान तुम्हें पुकारे ।
किधर खामोश हो छिपकर
इनको सताने के लिए ।।



.मैं मदमाता समय बावरा

कोई रहे ना रहे  ना भी रहे तो क्या होगा
यादें इस कदर बसी है
अपने मन तन बदन और अपनी हर धड़कन में  
कि अब किसी के होने ना होने पर भी
कोई अंतर नहीं पड़ता
फसलों की कटाई से दिखती है
मगर होती नहीं जमीन बंजर
पतझड़ में ही बसंत खिलता है
जेठ की जितनी हो तपिश
उतनी ही बारिश से मन हरा भरा होता है
ठंड कितनी भी कटीली हो
हाथों की रगड से गरमी आ ही जाती है।
मैं मदमाता समय बावरा
अपने सीने की धड़कन में देखता हूं नब्ज तेरा
हर समय हर दम
समय की बागडोर लेकर
घूमता हूं देखने
तेरी सूरत तेरी हाल तेरी आस प्यास
तेरी खुश्बू चंदन पानी में ही
शुभ छिपा है
मुस्कान की आस छिपी है
मैं मदमाता समय बावरा
छोड़ नहीं सकता अकेले
तुमको तो हंसना ही होगा खिलखिलाना ही पड़ेगा
इसी से
धरती की रास बनेगी आस बनेगी
लोगों में प्यार की प्यास जगेगी।
मैं मदमाता समय बावरा  
कल के लिए बचाना है समय  
कल के लिए, कलवालों के लिए
हरी भरी धरती में
हरियाली को बचाना है तुम्हारी तरह
तुम ही तो हो जीवन
सबकी  
मैं मदमाता समय का मस्त बावला।।



2

मैं मदमाता समय बावला
मेरी कदर न जाने कोय 
मैं ही हूं जो रहूंगा
हरदम हरपल हरसमय चारो तरफ
मेरी केवल एक चाल
फिर भी सब बेहाल , सब निहाल ।
तुमसे पहले मैं था
तुम्हारे बाद भी केवल मैं ही रहूंगा।
मुझसे होड़ करो,
मेरे संग चलो , मेरे अंग चलो
फिर भी जीतना मेरा ही तय है ।
मेरे हमदम मेरे हमसफर
जितना हो सके साथ चलो, साथ रहो।
छूटना ही है, एक दिन साथ का बंधन      
कभी सोचा है मेरा दुख
समय सुख नहीं केवल दुख है
न जाने कितनों की किलकारियों पर मैं हंसा
तो
अपने ही बच्चों के महाप्रयाण पर
गहरे दुख में मैं धंसा।
मैं मदमाता समय बावरा मेरी कदर न जाने कोय।।
सब मेरे हैं और मेरे संग ही तो रहे सदा
मैं निष्ठुर एक चाल का
हो न सका अपनों से कभी जुदां .
मेरे से पहले कोई नहीं
केवल मैं ही हूं एकला
सब मेरे सामने ही आकर , चले जाए।
मुझसे ही होड़ करे
और मुझको ही भूलकर चैन करे
मैं मदमाता समय बावला , मेरी कदर ना जाने कोय।
मैं बावरा होकर बावला
भूल नहीं पाता हूं अपने घाव
खूनी रक्तपात नरसंहार बम बिस्पोट 
सबके साथ मैं भी तो मरता हूं
सबके साथ साथ समय पर ही तो कालिख पुतती है
समय बड़ा बलवान
मगर
समय ही तो मारा जाता है बार बार बार बार
अपनो से अपनो के बीच अपनो के लिए
मैं मदमाता समय बावरा
मेरी कदर न जाने कोय।।   





 
  



निहारना

निहारना खुद को खुद में
इतना आसान कहां है
आईना / कातिल सा बेरहम
केवल सच बोलता है
सौंदर्य की भाषा में खुद को निहारना 
अपने तन की त्रुटियों की तलाश है
आज तो
लोग खुद से भागते हैं खुद को ठगते हैं
खुद को अंधेरे में ऱखकर
खुद से ही झूठ बोलते हैं।
मगर आईने में खुद को तलाशना
अपनी ही एक नयी खोज होती है
और सुदंर
पहले से सुदंर
......या अब तक की सबसे सुदंर ।
औरों से अलग या बेहतर
होना दिखना भी
कोई बच्चों का खेल नहीं
निहारना
सौंदर्य का दिखावा नहीं
केवल सुदंर तन की तलाश नहीं
निहारना तो
मन को भी सुदंर कर देती है
निहारना तो अपनी तलाश का आरंभ है।
और भला
कितने हैं लोग
जो निहारते हुए
खुद को भी खुद में ही
तलाशते हैं। निहारते हैं।।

पत्ता नहीं क्यों
नहीं चढ़ पाया /
रंग किसी का, किसी पर
न तेरे ही रंग से खिल पाया मैं
ना अपना ही रंग दिखता है तुम सा
बेरंग होकर भी /
 यह कौन सा रंग है नशा है , साया है, खुमार है
जिसमें सबकुछ दिखता है एक समान ही एक सा
एक ही तरह की सूरत मूरत
एक ही ध्यान
एक ही रंग रूप में
तेरी साया तेरी काया तेरी माया।।
फिर भी
निहारना खुद को खुद में तलाशतीहूं
अपनी मौलिक साया निर्दोष काया
केवल अपनी भाषा अपनी परिभाषा
निहारना
एक जुनून नहीं
अपनी तलाश है, अपनी खोज है
जो मिल नहीं रहीं
बार बार बार हर बार निहारते हुए खुद को
फिर भी ।  
 

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