रविवार, 22 जनवरी 2017

कहीं बेटा बाप बन गया तो कहीं बाप के लिए बेटा बन गए।











अनामी शरण बबल 

 राजनीति में संबंधों का कोई भूगोल नहीं होता। कौन कब कहां कैसे और किस तरह संबंधोंं में लोचा मार दे यह भगवान भी नहीं जानते। राजनीति से अरूचि रखने वाले जिस नासमझ शरीफ बेटे को नेताजी ने अंगूली पकड़
कर सांसदी से लेकर सीएम तक बना कर छोड़ा। वहीं बेटा एकाएक ज्ञानी ,ध्यानी अंतरजामी बनकर बाप की सालों की मेहनत को पल भर में ही हथिया लिया। बाप को गद्दी से उतारकर नयी पार्टी और सपा के पुराने सिंबल तक पर कब्जा जमाकर अपने बापू को दरकिनार धकेल दिया़ा। अपनी नाक बचाने के लिए नेताजी ने भी आत्मसमर्पण कर खामोशी की चादर ओढ़ ली। करीब तीन माह के इस समाजवादी महाभारत से सबकी इज्जत धूमिल(? ) हुई। पार्टी बिरासत के इस महाभारत में पूत समेत नेताजी की जीत हुई। सपा को गोतिया की पार्टी बनाने की अपेक्षा अपन खानदानी पार्टी बनाकर छोड़ाा, मगर अपनी साख को मतदाताओं के बाजार में सब गंवा बैठे।
उधर हंस हंसकर किसी को भी बेआबरू करने में माहिर और जल्लादों की तरह हमला करके उस पर पील पड़ने वाले नवजोत सिंह सिद्दू रिश्तों के मामले में एकदम भोला और ईमानदार निकले। गेदबाजों की कुटाई करने के लिए कुख्यात क्रिकेट बैकग्राउण्ड वाले महारथी आजकल टीवी संसार और क्रिकेट कॉमेंट्री में शेरो शायरी के लिए ज्यादामशहूर है। भाजपा से नाराज चल रहे ज्यादा बोलने में उस्ताद नवजोत ने एकाएक राज्यसभा सांसदी को उछाकर कमल के मुंह पर फेंकते हुए पल भर में ही पार्टी से नाता तोड लिया। आप के भरोसे ही शेर बनने वाले नवजोत को आप ही ने औंधे मुंह गिराकर चौराहे पर अकेले छोड़ दिया। मगर पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदरसिंह ने एक जलसे में नवजोत को बेटा कह कर संबोधितकिया। बेटे के संबोधन का मान रखते हुए अव क्रिकेटर नवजोत ने छक्का मारते हुए कहा कि जब उन्होने बेटा कहा है तो मैं भी एक बेटा का मान रखूंगा। अपने पिता पर किसी तरह की आंच आने से पहले मैं उनके सामने खड़ा रहूंगा। पुत्र की तरह ही अपने पिता के साथ हमेशा खड़ा रहूंगा। उनको बचाना और मिलकर काम करना ही मेरा फर्जहै। उन्होने तो अपनी पारी में मेरे विश्वास को जीता है, मगर अब बारी मेरी है। राजनीति में रहकर भी मैं रिश्तों को सार्थक बनाकरदिखाउंगा। लप्पेबाजी के लिए मशहूर नवजोत को अपने बयानों पर ही कुछ दिनों के बाद .संभवत यकीन हो या ना हो ? मगर फिलहाल 72 साला पूर्व सीएम को एक चहकता बेटा तो नसीब हो ही गया है, जो फिलहास अपने पिता के बारे में यह भी कह ही रहा हैं कि एक बेटा बाप से कभी बड़ा नहीं हो सकता। यानी नवजोत के इस चौके में दर्द है या उल्लास इसका फैसला तो समय नामक अंपायर ही करेगे जिसे सर्वमान्य भी माना जाएगा ।फिलहाल तो नवजोतकी नॉट आउट पारी से सबको बड़ी उम्मीदें है।




  वो हवा है 




वो बसंती हवा है / नरम नरम

वो धुन है सितार की / कोमल मुलायम तरल सी

वो राग है / झनकार है / मान मनुहार है

मधुर मनभावन

वो आवाज है / प्रेरक, दिलकश उम्मीद की

वो पावन है पवित्र है गंगाजल सी निर्मल है सुकोमल है।

वो जरूरी है धूप सी / सबकी है चांदनी सी रागिनी सी

तरल है सरल है चंचल है हवा सी ।।

सबों के दिल में रहती है / सबों के लिए दुआ करती है

सबों का है उस पर अधिकार / वो सबों की है

सबों को है उससे प्यार है

वो धरती है जमीन है परम उदार है / सब पर उसका उपकार है ।।

वो नरम डाली है / सुबह की लाली है फूलों सी प्यारी है

किसी बच्चे की मुस्कान है / पावन  भावन साज श्रृंगार है

हरियाली की जान है

बचाओं उसको

वो किसी एक की नहीं / उसमें सबों की जान है

वो एक नहीं अनेक है / सबके लिए सबकी दवा है

वो हवा है सबकी दुआ है ।

सबकी लाली है / हितकर- हितकारी है / बहुत बहुत प्यारी है।

समस्त सृष्टि की जान है समें समाहित ।
उसके भीतर स्पंदित  ।।.  

3
ना मैं भुलू ई होली 


होली बहुत बहुत मुबारक हो सखि।

होली बहुत बहुत मुबारक।।



रंगों गुलाल की इस होली में  / सबके तन पर रंगों का मैल

रंगो की रंगोली में तन मन सब मटमैल

पर तूने रंगी मन के रंग से  / निखर गया तन मन अंग प्रत्यंग

ऐसी होली से चूर मैं व्ह्विवल  / लगे रंग मोहि गंगाजल

करके इतौ जतन /  इस किंकर को मगन मदमस्त बनायौ।।

मैं ना भुलू इस होली को / ऐसी होली मोहे खिलायौं।।
मन के सबौ विकार दहे अगन में


तुमको भी बहुत मुबारक होली।

होली बहुत बहुत मुबारक हो सखि।।

तूने रंग दी नेह रंग से तन मन  / निखर संवर गयौ मोर पूरा बदन

धुल ग्यौ तन मन के मैल.

रंगों की ऐसी साबुन कभी देखी नहीं

नहीं रहे मैल जन् जन्म के

अंग अंग में नयी ताजगी नयी सनसनाहट

फूलो के अंगार फूटे, नयी सुबह की खुमार झूमे

तू धड़कन बन मोर  / खुश्बू की ऐसी पावन गंध चारो ओर।।



कभी ना खेली अईसी होली  / रंग गुलाला की रंगोली

मैं मतवाला झूम उठा

हरी भरी  धरती को चूम उठा

तूने दी ऐसी प्रीति मुझे  / जब चाहूं करके बंद नयन

होली को सपनों में भी shankardayal.blogspot.comयाद करूं

रंगों के संग केवल, तुझको याद करूं
जन्म जन्म तक ना मैं भुलू ई होली
हे प्रभू यही तुमसे फरियाद करूं।।
होली बहुत बहुत मुबारक हो सखि।
होली बहुत बहुत मुबारक।। 

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1 टिप्पणी:

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